ली और काल्विन अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाने की नि:शुल्क व्यवस्था है। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और उसके बाद लॉक डाउन यानी तकरीबन आठ दिनों के दौरान कुते काटने की घटनाएं दोगुनी हो गई है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या से इसकी पुष्टि होती है।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक पहले सौ से डेढ़ सौ लोग आते थे, अब कुता काटने का इंजेक्शन लगवाने के लिए 300 से अधिक लोग पहुंचते हैं।अस्पतालों में अब इसकी मांग करने वाले 300 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि इंजेक्शन की कमी नहीं है जबकि लोगों को इंजेक्शन नहीं लगाए जा रहे हैं। ओपीडी बंद होने की बात कहकर लोगों को लौटाया जा रहा है। बेली अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक सुषमा श्रीवास्तव का कहना है कि कुते काटे जाने के मामले बढ़े हैं।
खाना खिलाएं तभी होंगे शांत
आवारा कुतों को खाना खिलाए जाने के बारे में मुख्य सचिव ने निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद भी नगर निगम और अन्य किसी विभाग ने इसकी पहल नहीं की है। वहीं कई स्वयंसेवी संस्थाओं ने आवारा कुतों को खाना खिलाने का काम शुरू किया है। इस संबंध में सोशल मीडिया में कई तस्वीरें भी वायरल की गई हैं। पशुपालकों का मानना है कि भूखे कुतों को खाना खिलाएंगे तभी वे शांत होंगे।